अगर हाल-फिलहाल में आपके दरवाजे पर भी कोई सरकारी कर्मचारी मोबाइल ऐप या टैबलेट लेकर आया है, तो टेंशन लेने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। असल में, देश में Jan-ganana का महा-अभियान ग्राउंड लेवल पर शुरू हो चुका है। कोविड-19 महामारी की वजह से जो काउंटिंग टल चुकी थी, वो अब एकदम नए और हाई-टेक अवतार में Census 2027 के रूप में शुरू हो चुकी है।

केंद्र सरकार ने इस बार पुराने कागजी ढर्रे को पूरी तरह विदा कर दिया है। आइए बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि ग्राउंड लेवल पर इस समय सेंसस को लेकर क्या चल रहा है और इस पूरी डिजिटल जनगणना से आपकी जिंदगी में क्या बदलने वाला है।
ग्राउंड लेवल पर चल रहा है Census Phase 1
भारत जैसे विशाल देश की आबादी को गिनने के लिए सरकार ने इस पूरे मिशन को दो मुख्य हिस्सों में बांटा है, जो इस प्रकार है:
- Houselisting: वर्तमान में जमीनी स्तर पर मकान सुचिकरण का काम चल रहा है। इसके तहत सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर मकानों को नंबर दे रहे हैं, साथ ही वे आपकी बिल्डिंग की स्थिति और वहां उपलब्ध बुनियादी सुख-सुविधाओं का डेटा जुटा रहे हैं। यह काम अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक अलग-अलग राज्यों में पूरा किया जाएगा।
- Population Enumeration: जनसंख्या की जनगणना ही मुख्य फेज होगा, जो फरवरी 2027 में शुरू किया जाएगा। इसमें सीधे तौर पर लोगों के नाम, उम्र, पढ़ाई, रोजगार और आंकड़े दर्ज किए जाएंगे। सरकार ने इसके लिए मुख्य रेफरेंस डेट 1 मार्च 2027 तय की है।
- Local Update: लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के जिन पहाड़ी इलाकों में सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है, वहां मौसम खराब होने से पहले ही सितंबर के आसपास यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
क्यों खास है Census 2027? ये 3 बातें जानना बेहद जरूरी है
- 100% पेपरलेस और मोबाइल ऐप: इस बार प्रगणक कोई बड़ा भारी रजिस्टर लेकर नहीं घूम रहे हैं। उनके स्मार्टफोन में एक खास ऑफलाइन मोबाइल ऐप है, जिसमें दर्ज किया गया डेटा सीधे सरकारी सर्वर पर सुरक्षित तरीके से अपलोड हो जाता है।
- घर बैठे ऑनलाइन सेल्फ-एन्युमरेशन: इतिहास में पहली बार नागरिकों को यह सुविधा मिली है कि वे आधिकारिक जनगणना पोर्टल पर जाकर अपने परिवार की जानकारी खुद ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं। यह पोर्टल हिंदी-अंग्रेजी समेत 16 क्षेत्रीय भाषाओं में काम करता है। अगर आपने खुद ऑनलाइन डेटा भरा है, तो कर्मचारियों के आने पर आपको बस अपनी जनरेटेड आईडी शेयर करनी होगी।
- जातिगत आंकड़ों पर नया अपडेट (Caste Census in India): साल 1931 के बाद यह पहला मौका है जब देशव्यापी जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) और कुछ विशिष्ट समुदायों के जातिगत आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुटाए जा रहे हैं।

इस बार लिस्ट में शामिल हैं ये 31 ‘न्यू-एज’ सवाल
बदलते दौर और डिजिटल लाइफस्टाइल को ध्यान में रखते हुए सरकार ने जनगणना फर्स्ट फेज के लिए कुल जनगणना 31 सवाल तय किए हैं। इस बार के सर्वे में कुछ बेहद मॉडर्न पॉइंट्स जोड़े गए हैं, जो इस प्रकार है:
- क्या आपके घर में इंटरनेट कनेक्शन और स्मार्टफोन या लैपटॉप उपलब्ध है?
- रसोई में खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से किस ईंधन का इस्तेमाल होता है यानी कि LPG सिलेंडर या पाइप वाली PNG गैस?
- आपके परिवार के पास आने-जाने के लिए कौन सा वाहन है टू-व्हीलर या फोर-व्हीलर?
- आपके घर में पीने के पानी का मुख्य जरिया क्या है, जैसे नल का पानी, हैंडपंप या पैकेज्ड वाटर?
- मकान की छत, दीवार और फर्श बनाने में किस मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है?
जनगणना बजट, मैनपावर और डेटा सुरक्षा का पूरा सच
- भारी-भरकम बजट: इस विशाल डिजिटल काम को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए सरकार ने ₹12,000 करोड़ से अधिक का अनुमानित बजट तय किया है।
- 34 लाख से ज्यादा की फौज: देश के हर कोने तक पहुंचने के लिए लगभग 34 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को इस फील्ड में उतारा गया है जिसमें सबसे बड़ी संख्या लोकल स्कूल टीचर्स की है। जन जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार ने दो मस्कट भी जारी किए हैं, जिनका नाम ‘प्रकर्ष’ और ‘प्रगति’ है।
- आपकी प्राइवेसी 100% सुरक्षित: डिजिटल युग में डेटा लीक को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। सरकार ने साफ किया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत नागरिकों द्वारा दिया गया हर एक डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। इसे किसी भी अदालत या निजी संस्था के साथ शेयर नहीं किया जाएगा।
आखिर हमारे लिए क्यों जरूरी है Census 2027?
- जब तक सरकार के पास इस बात के सटीक आंकड़े नहीं होंगे कि किस राज्य, शहर या गांव में कितने लोग रहते हैं, तब तक लोक-कल्याणकारी योजनाएं जैसे मुफ्त राशन, नए अस्पताल, सड़कें, ट्रेनें अथवा स्कूल कॉलेज सटीक तरीके से नहीं बनाई जा सकतीं। अगले 10 साल तक देश के विकास का ब्लूप्रिंट इसी डेटा पर निर्धारित होगा। इसके अलावा, आगामी लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन भी इन्हीं आंकड़ों के आधार पर होना है।
- एक आखरी काम की बात: जब भी प्रगणक आपके घर आएं, एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर उनके साथ पूरा सहयोग करें और सही जानकारी दर्ज करवाएं। यह देश के डिजिटल और मजबूत भविष्य के निर्माण में आपकी सीधी भागीदारी है।
Disclaimer: यह आर्टिकल भारत सरकार के गृह मंत्रालय, रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (ORGI) द्वारा जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइंस और प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की लेटेस्ट रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक जानकारी प्रदान करना है, Census 2027 से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए केंद्र सरकार के ऑफिशियल पोर्टल जारी गाइडलाइंस को ही अंतिम आधार मानें। इसके अलावा रोजाना ऐसी ही लेटेस्ट ही वायरल एजुकेशन न्यूज सबसे पहले जानने के लिए आप हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वॉइन कर सकते हैं।
निष्कर्ष: डिजिटल तकनीक और जातिगत आंकड़ों के नए अपडेट के साथ शुरू हुई Census 2027 देश की तरक्की का नया ब्लूप्रिंट बनेगी, जिसमें सही जानकारी देकर भागीदारी निभाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।